AuthorTopic: Live Interview with our Mr. Vijay Singh Butola.. a dedicated member of YU Team..  (Read 5970 times)

Offline Dhirendra Chauhan "Deva"

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  • DON ko pakadna muskil hi nahi namumkin bhi hai....
Suniy Suniye suniye...............  :smash: :smash: :smash:
Aaj aap sabhi logon se mukhatib honge hamare sabse samarpit yuva sadashya Mr. Vijay singh Butola, ek karmath, imandar aur jujharu sadasya jo YU ke naye aur purane sabhi sadashyon ke lie prernasrot hain...

To aayiye aur aap sabhi log unse thodi bahut kuch khatti kuch mithi baten kar lijiy


so WELCOME MR. VIJAY SINGH BUTOLA..... 
:smiley32: :smiley32: :smiley32:
« Last Edit: December 16, 2008, 11:41:16 AM by Dhirendra Chauhan "Deva" »
एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।...

Mob - 919720004597

Offline "गढ़वाल सम्राट" पंवार विपिन चंद्र पाल सिंह

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  • ये दिल है बड़ा ही दीवाना; छेड़ा न करो इस पागल को
WAHAAAAAAAAAAAAAAAA

Butola Ji aapka samaya ab suru hotaa hai

1: Aapki sehat ka raj

2: Aaap bhooke kyon nahin raha sakte
------------
"मातृभूमि, मातृसंस्कृति और मातृभाषा। यह तीन देवियां हैं, इनका सम्मान करना चाहिए। इनही से ही संसार में सम्मान मिलता है।"
---------
मेरा पागलपन :
उत्तराखंडी ई-पत्रिका: http://e-magazineofuttarakhand.blogspot.com/

Offline Dhirendra Chauhan "Deva"

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BUTOLA JEE SABSE PAHLE SABHI MEMBERS KO APNA SANKSHIPT PARICHAY DEIJIYE..
एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।...

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Offline Vijay Butola

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मेरे सम्मानित मित्रो,

मेरा नाम विजय सिंह बुटोला है | मैं मूल रूप से टिहरी गढ़वाल ,तहसील देवप्रयाग, ब्लाक कीर्तिनगर ,ग्राम अमोली का निवासी हूँ तथा वर्तमान समय में सपरिवार दिल्ली में ही रहता हूँ | मैं गुडगाव में एक प्राइवेट फार्म में लेखा विभाग में कार्य करता हूँ |


मैं यह पर उपस्थित यंग उत्तराखंड के सभी देवियों व सज्जनों का हार्दिक धन्यवाद प्रकट करता हूँ की उन्होंने मुझे बोर्ड पर सजीव साक्क्षात्कार के लायक समझा |

दोस्तों मैं भी आपके ही जैसा सदस्य हूँ तथा अपनी समर्थ शक्ति के अनुसार इस समूह की गतिविधियों में सम्मिलित हूँ |

मैं यहाँ पर श्री धीरेन्द्र चौहान जी का हार्दिक आभार प्रकट  करता हूँ जिन्होंने मुझे बोर्ड पर  सजीव साक्क्षात्कार में अवसर दिया |
« Last Edit: December 16, 2008, 12:00:38 PM by V S Butola 007 »

Offline Vijay Butola

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प्रिय पंवार जी , भरपूर पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, और निर्दोष पानी ही मेरी सेहत का राज है |
खाना मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है | मुझे इस दुनिया में किसी विशेष वस्तु से इतनी प्रेम नही जितना की अपने मनपसंद भोजन से | 

मेरा दैनिक आहार और मात्रा
सुबह एक लीटर दूध के साथ चार उबले अंडे साथ में 10-12 ब्रेड टोस्ट 
दोपहर में करीब 20-22 रोटिया, 300 ग्राम सलाद और सब्जिया या दाल
रात को 500 ग्राम चावल का भात, दाल, सलाद, रोटिया ,रायता और कुछ मीठा

Offline गायत्री

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श्री बुटोला जी नमस्कार,
सब कुछ तो टिक है पर ये निर्दोष पानी क्या है?
कृपया करके इस पर प्रकाश डालिये
धन्यवाद
आपका मित्र

Offline vivekpatwal

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प्रिय पंवार जी , भरपूर पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, और निर्दोष पानी ही मेरी सेहत का राज है |
खाना मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है | मुझे इस दुनिया में किसी विशेष वस्तु से इतनी प्रेम नही जितना की अपने मनपसंद भोजन से | 

मेरा दैनिक आहार और मात्रा
सुबह एक लीटर दूध के साथ चार उबले अंडे साथ में 10-12 ब्रेड टोस्ट 
दोपहर में करीब 20-22 रोटिया, 300 ग्राम सलाद और सब्जिया या दाल
रात को 500 ग्राम चावल का भात, दाल, सलाद, रोटिया ,रायता और कुछ मीठा



manniya Butola ji,
aahar to aapka samanya hi hai,
1. aapka hindi prem dekhkar me gadgad ho jata hoon, mein jaan sakta hoon ki aapka hindi ke prernashrot kaun hai?
2. aap YU ko agle 3 varsho me kahan par dekhna chahenge?
Vivek Patwal
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Insurance Advisor
ING VYSYA LIFE INSURANCE

Offline जगमोहन सिंह जयाड़ा "ज़िज्ञासु"

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  • देवभूमि उत्तराखण्ड को देखूँ, उड़कर अनंत आकाश से...
चेहरा आपका भोला है,
प्रिय विजय बुटोला,
अपनी सेहत का राज,
अब है आपने खोला.

प्रकृति ने सब कुछ दिया है,
छक छक कर खाओ,
पर ध्यान रहे इस जगत में,
प्रभु का गुण भी गाओ.

दोस्त आपके कहते हैं,
उत्तराखंड के खली महावली,
तनिक मन में सोचो अपने,
कैसी उन्होंने चाल चली.

मुझे लगता है आप हो,
सबकी आँखों के तारे,
उत्तराखंड में जनम लिया,
धन धन भाग तुम्हारे.

जगमोहन सिंह जायर, जिग्यांसू
16.12.08
कितनी सुन्दर देव-भूमि, देखूं उड़कर आकाश से, नदी पर्वतों को निहारूं,जाकर बिल्कुल पास से...रचना: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"

Offline Vijay Butola

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प्रिय गायत्री जी , निर्दोष पानी एक ऐसा पेय है जो अमृत के समान है | इसे पीकर व्यक्ति प्रफुल्लित और चिरायु रहता है व  असीम आनंद की अनुभूति होती जिसे केवल पीने वाला ही जान सकता है शब्दों में इसका साक्षेप विवरण कर पाना कठिन है | यदपि यह अमृत सर्वत्र उपलब्ध है परन्तु इसको पाने हेतु कई पापड़ बेलने पड़ते है व कठिन प्रयास करना पड़ता है | कभी मिलिए आपको भी निर्दोष पानी का रसपान अवश्य करवाएंगे |

Offline Vijay Butola

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जायाडा जी मुझ पर बहुत सुंदर कविता लिखी आपने , आपका हार्दिक धन्यवाद

Offline "गढ़वाल सम्राट" पंवार विपिन चंद्र पाल सिंह

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वाह बुटोला जी क्या आहार लेते हो ......लगता है पुरुनेंदु के भी आप गुरु निकले

धन्य है हमारी भांजी (आपकी पत्नी) जो आपके लिए इतने आहार का इंतजाम कर लेती है

प्रश्न 1: आप इनता सुंदर लिखते हो. इसके पीछे किसका हाथ है .
प्रश्न 2: आपने अभी तक क्या अपनी ज़िन्दगी सबसे अच्छा किया
प्रश्न 3: यंग उत्तराखंड से जुड़ने के बाद आपको कैसा लगा
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Offline Vijay Butola

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प्रिय पटवाल जी

मुझे हिन्दी में लिखना व बोलना बहुत भाता है | मैं अपने विद्यालयी जीवन में भी हिन्दी की बहुत कविताये लिखता था , समय गुजरा या सब छुट सा गया परन्तु यंग उत्तराखंड में आने के बाद मैंने फिर से अपनी दबी हुई इच्छा को जगाया और फिर से कुछ लिखने लगा |

मेरी हिन्दी कोई खास नही है मुझे अभी इसमे प्रखर होने के लिए बहुत अभ्य्यास और परिश्रम की आवश्यकता है | मैं हिन्दी से जुड़ी रचनाये, पुस्तके , वेब साइटें ,पत्रिकाए व समाचार-पत्र पढता हूँ इससे मेरा हिन्दी का ज्ञान बढ़ता है | ऐसा नही है की मुझे अन्य भाषाओ से लगाव नही ,मैं नित्य अपने आफिस में अंग्रेजी में ही समस्त कार्य करता हूँ किंतु मैं अन्य जगह हिन्दी के प्रयोग को ही प्राथमिकता देता हूँ |

मेरा आप सभी से निवेदन है की आप सभी हिन्दी का प्रयोग  अपने दैनिक व वय्व्हारिक जीवन में अपनाए ताकि हमारी मातृभाषा हिन्दी का उत्कर्ष हो |

Offline Dhirendra Chauhan "Deva"

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Butola jee, aapne jis tarah se nirdosh pani ka varnan kia hai mera nirdosh pani ke liye ye mamatamayi hirdya gdgad ho utha hai....


harivans rai bachhan ji ki in char panktiyon par aapna dhyan jarur daliyega..

एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।..
 
एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।...

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Offline Vijay Butola

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पटवाल जी आपमें मुझसे दूसरा प्रश्न किया की अगले तीन वर्षो में आप यंग उत्तराखंड को कहा देखन चाहते हो ?

श्रीमान जी , मेरी यह हार्दिक इच्छा है की यंग उत्तराखंड अगले 3 वर्षो से भी पहले हम अपने समस्त लक्ष्यों व उद्देश्यों को पाने में सफल हो | इसका प्रचार -प्रसार समस्त विश्व में फैले और यह उत्तराखंड से जुड़ी एक अद्वितीय और प्रशस्त जन-समूह बने | यंग उत्तराखंड के समस्त प्रशासनिक कार्यो व लक्ष्यों की प्राप्ति हो |

सबसे बड़ी व अहम् बात यह की हम सब आपस में संगठित, निस्वार्थ भावः कर्मठता व परस्पर संपर्कता को अपना आधार बना इस समूह को एक नया आयाम दे कर इसके लक्ष्यों के प्राप्ति हेतु अपना सामर्थानुसार अपना योगदान दे |

Offline vivekpatwal

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DHANYAVAAD BUTOLA JI, :)
Vivek Patwal
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