यंग उत्तराखंड पोर्टल भूतहा सा लगता है. न जाने क्योँ बेमुख हो गए सारे लोग. चुप रहना अपराध है, "भौंकुछ" ही बोलो, उचित होगा. मैं तो तिल के सामान हूँ....तेल तिलों से निकलता है....कवियौं के मन से कवितायेँ, रचनाएँ आप लोग ही ऊगलवाते हो....कुछ नहीं कहोगे....लगेगा हम पागल हैं. समय निकलने और किसी के चले जाने के बाद ही उसकी याद आती है. आज हमारा है कल और किसी का होगा. नाराज न होना मित्रों, कहना अपना स्वाभाव है. भला मानों या बुरा. किसी ने अगर बुटोला जी को देखा हो तो जरूर मेरे पास लाना, बड़ी शिकायत हैं उनसे. क्यौन्कि वे मेरे बलशाली भीमकाय छोटे भाई हैं लेकिन हमने किसी से लड़ना नहीं है....देखना है एक दूसरे को घूर घूर कर प्रेम से.