आंखें नम कर गई याद आली टीरी
देहरादून: उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के अंतिम दिन टिहरी की स्मृतियों को ताजा करती चर्चित गढ़वाली फिल्म याद आली टीरी के भावपूर्ण दृश्यों को देख दर्शकों की आंखें नम हो आई। इस दौरान फिल्म उद्योग के जनक दादा साहब फाल्के की याद में उनकी बायोग्राफी फाल्के चिल्ड्रन का प्रदर्शन भी हुआ। गढ़वाली में बनी अब तक की सबसे बड़े बजट की फीचर फिल्म सिपैजी के साथ समारोह संपन्न हो गया। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने फिल्म निर्मात्री आशा सकलानी समेत निर्माता-निर्देशक को प्रमाणपत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि तीन माह के भीतर सूबे की फिल्म नीति घोषित कर दी जाएगी। संचालन करते हुए पूजा भाटिया ने राजधानी में पहली बार हुई इस पहल को भविष्य के लिए नींव की ईट बताया। इस दौरान फेस्टिवल डायरेक्टर डा.आरके शर्मा, दिनेश गुसाई, केपी ढौंडियाल, राजेश जोशी आदि मौजूद थे। इससे पूर्व उत्तराखंड पैकेज के तहत तीन फीचर व चार डाक्यूमेंटरी फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। शुरुआत केपी ढौंडियाल निर्देशित डाक्यूमेंटरी उत्तराखंड का जन आंदोलन से हुआ और फिर भावना कपूर निर्देशित पॉजिटिव व निखिल आल्वा की डाक्यूमेंटरी स्केलेटन लेक दिखाई गई। समारोह का सबसे यादगार क्षण था झील में समाई टिहरी की संवेदनाओं को उकेरती याद आली टीरी का प्रदर्शन। समापन सत्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता सुभाष अग्रवाल द्वारा निर्देशित युग दृष्टा-युग सृष्टा महर्षि दयानंद सरस्वती व अमर शहीद श्रीदेव सुमन का प्रदर्शन भी हुआ। अंतिम सोपान के रूप में पर्दे पर नमुदार हुई अब तक के सबसे बड़े बजट की गढ़वाली फीचर फिल्म सिपैजी। यह इस फिल्म का प्रीमियर भी था। फिल्म में देशभक्ति के उस जज्बे को उभारा गया है।