कहने को तो कुछ भी कह दूँ..मगर बदलते दौर से डरता हूँ मैं..कब तक रहेगा यही मुखौटा चेहरे पर मेरे..
खुद भी नहीं जानता हूँ मैं, इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में ख्वाबों कि दुनिया का मैं भी
एक भटकता हूँ मुसाफिर, चला जा रहा हूँ .जा कहाँ रहा हूँ
शायद अब तक नहीं पता मुझे, बस चल रहा हूँ
इसलिए कि रुकना खुद को कुबूल नहीं ...
हर चेहरे के पीछे ना जाने कितने चेहरे छुपे हैं यहाँ......
रिश्तों को टूटते देखा है अक्सर मैने ......जाने क्या चाहता हूँ
खुद से और क्यूँ भटक रहा हूँ अब तक एक सवाल है मेरे लिए ..
जिसका ज़वाब तलाश रहा हूँ मैं ...अपनी एक ख्वाबों कि दुनिया बसा रखी है मैने.........
खुद को खुद का साथी समझता हूँ मैं .......हमसफर समझता हूँ मैं....
वेसे तो कुछ भी खाश नहीं है मुझमें, फिर भी ना जाने भीड़ से अलग चलता हूँ मैं...
लोगो को और उनके रिश्तो कि देख के अक्सर खामोश हो जाता हूँ मैं.....
कभी गर मिलूँगा खुदा से तो पूछुंगा .."खुदा इस खमोशी को वजहा क्या है ??"
मनीष मेहता नाम है.....पेट के खातिर बिगत कुछ बर्षो से दिल्ली मैं हूँ.
एक जॉब के साथ साथ मीडिया और रंगमंच कि दुनिया से जुड़ा हूँ...
* संगीत से बेहद लगाव है मुझे...अच्छे लिखे हुए
* अच्छे संगीत से सजे हुए और अच्छी तरह से गाये सभी गाने पसंद हैं.चाहे वो किसी भी भाषा के हो.
o गीत-संगीत में बेहद रूचि
o कवितायेँ-कहानियाँ लिखना और पढ़ना
o फिल्मे देखना
ज़िन्दगी का एक छोटा सा हिस्सा किताबों के साथ गुजार दिया है.
घुमक्कड़ प्रवर्ति का हूँ
o दोस्तों के साथ वक़्त बिताना , किताबों के बहुत करीब हूँ.....ज़िन्दगी का एक छोटा सा हिस्सा किताबों के साथ बीत गया...रंगमंच कि दुनिया मैं कुछ काम करना चाहता हूँ....
o ज़िन्दगी बहुत हसीं है, ज़िन्दगी के कुछ हसीं पलो कप आपके साथ बिताऊंगा.......!!!
* इन्ही शब्दों के साथ
आपका अपना
मनीष मेहता
manishmehta@live.comhttp://www.crewhunt.com/manishmak