ऊंचे शिखरों की अनदेखी-अनजानी राहें
शिव के नित्य मार्ग पर
उत्तरांचल में पंचकेदार सबसे लोकप्रिय ट्रेक है। इसमें 14 दिन का समय लगता है। भगवान शिव को पांच मंदिरों में अलग-अलग रूपों में देखा जा सकता है। ये सभी मंदिर अलग-अलग घाटियों में हैं। ये घाटियां हैं-केदारनाथ घाटी (5384 मीटर), मदमहेश्वर घाटी (3289 मीटर), तुंगनाथ घाटी (3810 मीटर), रुद्रनाथ घाटी (2286 मीटर) और कल्पनाथ घाटी (2134 मीटर)। ये सभी स्थान उत्तरांचल के गढवाल क्षेत्र में हैं। इसके अलावा कुछ और महत्वपूर्ण ट्रेक भी हैं।
रूपकुंड ट्रेक : रूपकुंड झील त्रिशूल पर्वत पर 5029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कुमाऊं क्षेत्र में धराली से इसके लिए रास्ता जाता है। जो बद्रीनाथ को जाने वाले हाइवे से मिलता है। ट्रेकिंग करते हुए 6-7 दिन में सुगमता से झील पर पहुंचते हैं। वापस आने में समय कम लगता है।
फूलों की घाटी : बद्रीनाथ धाम के रास्ते में गोविंदघाट से 19 किमी की दूरी पर फूलों की घाटी है। घाट से ट्रेकिंग प्रारंभ होती है। घाटी की लंबाई 10 किमी और चौडाई 2 किमी है। 3000 मीटर से 4000 मीटर तक की ऊंचाई पर स्थित इस घाटी में अकसर अगस्त मास में जाया जाता है। उस समय वहां अत्यधिक फूल खिले होते हैं। अनायास ही आगंतुक कह उठता है कि यही स्वर्ग है।
इसके अलावा हर की दून का ट्रेक भी बहुत मशहूर है। देहरादून से मसूरी होते हुए परोला पहुंचा जाता है। वहां से ट्रेकिंग करके 7 से 8 दिन में हर की दून पहुंचते हैं। यहां के लिए मानसून का समय सबसे उपयुक्त है, जब सब ओर फूल ही फूल खिले होते हैं।
पूरे भारत की आस्था का केंद्र गंगोत्री ट्रेकिंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां से भागीरथी नदी के स्रोत गोमुख तक का ट्रेक बहुत प्रसिद्ध है। इसके ऊपर तपोवन (14000 फुट) और फिर ऊपर तपोवन होकर केदार डोम पर्वत चोटी के बेस कैंप तक ट्रेकिंग की जा सकती है। केदारनाथ ट्रेक (161 किमी), डोडीताल ट्रेक जिसके लिए दो से तीन दिन लगते हैं।
लगभग हर पर्वत शिखर के बेस कैंप तक ट्रेकिंग की जा सकती है। शर्त यही है कि कहीं भी टेक्निकल क्लाइंबिंग आडे न आ जाए।
नौर का कुछ क्षेत्र आज भी इनर लाइन अर्थात् सामरिक दृष्टि से वर्जित क्षेत्र में आता है। परंतु अब सांगला, स्पीति, रोपा, बासपा, टिडोंग और भाबा इन सभी घाटियों की ट्रेकिंग की जा सकती है। सांगला घाटी में छितकुल (3500 मीटर) नामक गांव से आगे नहीं जाया जाता। तिब्बत से सटे इस क्षेत्र में लियो तथा पारगियल (6816 मीटर और 6791 मीटर) दो जुडवां चोटियां हैं। रिकॉग पियो किन्नौर का हेडक्वार्टर है। यहां से किन्नर कैलाश के सुंदर दर्शन होते हैं तथा तीन दिन ट्रेकिंग करके 19000 फुट ही ऊंचाई पर शिवलिंग के दर्शन तथा पवित्र यात्रा की जाती है।