AuthorTopic: उत्तराखंड के जन्म दाता की जन्म भूमि अखोडी  (Read 2470 times)

Offline भगवान सिंह रावत

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आप सभी  उत्तराखंडी भाई-बहिनों का स्व. श्री इंदरमणि बदोनी जी की जन्म भूमि अखोडी में आपका स्वागत है.  अखोडी के बारे में वेसे तो आप लोगो को पता होगा .. फिर भी में आप लोगो को बता देता हूँ .. अखोडी टेहरी जिले के घनसाली बिलोक में पड़ता है घनसाली से ३० की. मी. की दुरी पर है ,अभी २४ दिसम्बर  श्री बडोनी जी की मूर्ति का अनावरण करने  उत्तराखंड के मुखियामंत्री श्री खंडूरी जी गए थे. मुझे सबसे अच्छी बात उनकी ये लगी, की उन्होने जब अखोडी में भाषण दिए थे . तो गढ़वाली में ही दिए अखोडी.की जनता को खंडूरी जी के भाषण बहुत पसंद आये है.. बाकि अखोडी आज भी टेहरी गढ़वाल में सबसे बड़ा गांव यहाँ पर  करीब ४०० परिवार है.. और करीब १२-१३ जातिया है. अखोडी की पूर्ब में भगवान बिश्वानाथ का मंदिर है , जो बडोनी जी का सपना था की बिश्वानाथ उत्तराखंड का ५वां तीर्थस्थल हो . आज भी बिश्वानाथ मंदिर के दर्शन करने लोग दूर -२ से जाते है. यहाँ पर जून में गंगा दशेरा के नाम से मेला लगता है. और अखोडी के उत्तर में एंच्वा की आछरी  का मंदिर है .आज भी यहाँ पर  बासमती के चवाल की बुशी मिलती है ..यहाँ पर भी लोग दूर -२ से जाते है.. और अखोडी के पास  में  ही महादेव जी का मंदिर है . इस मदिर में आज भी पुरानी प्रथा है . यहाँ  पर ११ गांव वाले मिलकर  २ देवदार के पेड़ लाते है और मंदिर के सामने उनका झुला बनादिया जाता है..  यहाँ  पर जो भी शिव भगत जाता है उसकी मनो कामना पूरी होती है.. आप  सभ लोगो  का अखोडी आवागमन  में स्वागत है .
   धानियाबाद       भगवान सिंह  रावत  अखोडी
             

Offline नेगी दा

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आप सभी  उत्तराखंडी भाई-बहिनों का स्व. श्री इंदरमणि बदोनी जी की जन्म भूमि अखोडी में आपका स्वागत है.  अखोडी के बारे में वेसे तो आप लोगो को पता होगा .. फिर भी में आप लोगो को बता देता हूँ .. अखोडी टेहरी जिले के घनसाली बिलोक में पड़ता है घनसाली से ३० की. मी. की दुरी पर है ,अभी २४ दिसम्बर  श्री बडोनी जी की मूर्ति का अनावरण करने  उत्तराखंड के मुखियामंत्री श्री खंडूरी जी गए थे. मुझे सबसे अच्छी बात उनकी ये लगी, की उन्होने जब अखोडी में भाषण दिए थे . तो गढ़वाली में ही दिए अखोडी.की जनता को खंडूरी जी के भाषण बहुत पसंद आये है.. बाकि अखोडी आज भी टेहरी गढ़वाल में सबसे बड़ा गांव यहाँ पर  करीब ४०० परिवार है.. और करीब १२-१३ जातिया है. अखोडी की पूर्ब में भगवान बिश्वानाथ का मंदिर है , जो बडोनी जी का सपना था की बिश्वानाथ उत्तराखंड का ५वां तीर्थस्थल हो . आज भी बिश्वानाथ मंदिर के दर्शन करने लोग दूर -२ से जाते है. यहाँ पर जून में गंगा दशेरा के नाम से मेला लगता है. और अखोडी के उत्तर में एंच्वा की आछरी  का मंदिर है .आज भी यहाँ पर  बासमती के चवाल की बुशी मिलती है ..यहाँ पर भी लोग दूर -२ से जाते है.. और अखोडी के पास  में  ही महादेव जी का मंदिर है . इस मदिर में आज भी पुरानी प्रथा है . यहाँ  पर ११ गांव वाले मिलकर  २ देवदार के पेड़ लाते है और मंदिर के सामने उनका झुला बनादिया जाता है..  यहाँ  पर जो भी शिव भगत जाता है उसकी मनो कामना पूरी होती है.. आप  सभ लोगो  का अखोडी आवागमन  में स्वागत है .
   धानियाबाद       भगवान सिंह  रावत  अखोडी
             


Thanks B.S.Rawat ji....
Indra Mani badoni ji ko samast uttarakhand ki or se sat sat pranam
ह्वे गे झिग्जा पुतुडी

Offline भगवान सिंह रावत

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देव भूमि उत्तराखंड में कुछ एसी भी जगह है . जिसके बारे में लोगो को पता नहीं है .. हम लोग इसी देब भूमि में पैदा हुए है लेकिन हम अनजान है., जब कोई बहार का आदमी हमें पूछता है की यार ये जगह कहाँ पड़ेगी . तो हमें उसके सामने सर्मिन्दा होना पड़ता है . की पता नहीं है यार .. एसी ही एक जगह है ."बिश्वानाथ" यहाँ मंदिर घनसाली से ३५ कम . के आस -पास है. आज भी लोग यहाँ पर भगवान बिश्वानाथ के दर्शन के लिए जाते है.. यहाँ पर और कुछ नहीं है लेकिन जो   मन को शांति  मिलती है . उसे भुलाया नहीं जाता है . और जहाँ पर मन को शांति मिल जाय और क्या चाहिए .  यहाँ पर स्वामी रामतीर्थ जी ने भी तपयासा की थी ..

Offline भगवान सिंह रावत

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दुनिया की भीड़ से विश्वनाथ की और .............
आपके नाम में ही भगवान हे इस लिए तू आपका नाम भगवान हे ::::

भगवान भाई जी मुझे या जान कर अति खुसी हुयी हे की इस घटी में आप जैसे महान लोगो का जन्म हुआ हे .आज न जाने सालों बाद ऐसा लगा की हम दुनिया की इस रफ्तार में इतने भाग रहे हें की हम अपनी जन्म भूमि को भी याद नहीं करते हें . हमे दुनिया के बारे में सब पता हे मगर हम अपने घर से अंजान हें हमे न जाने क्यों और किस की तलाश हे . सच कहता हू अगर कही चैन हे तो ओ जगह विश्वनाथ ही हे . में आपका जीवन भर अभारी (भगवान भाई जी ) रहूगा की आपने इस दुनिया के भीड़ में भी अपना एक अलग एक स्थान बना कर रखा हे और हमे भी इस बात कि खुसी हें जी .

विश्वनाथ के बारे में :

विश्वनाथ वह स्थान हे जाह मन की शांति हे . और कुछ भी नही हे . और आप तो जानते हे की मन की शांति मिल जाये तो सब कुछ मिल जाता हे इस दुनिया में विश्वनाथ को अगर शब्दों में बया करे इसे शब्दों की मेरे पास कमी हे .......................................... जय विश्वनाथ जी की

sushil sharma

Offline Sachin Sharma

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ghansayli se kis taraf

tehri ki taraf  ya ghuttu ki taraf ya agast muni ke taraf
दुनिया पागल है या फिर मै दीवाना

Offline Vijay Butola

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रावत जी नमस्कार,

आपने सच मे हमे बहुत अच्छी जानकारी दी ,इसके लिए आप का धन्यवाद |
जैसा आपने कहा की अखोडी टिहरी मे सबसे बड़ा गाव है, इस तथ्य  पर  मुझे  थोडी दुविधा है |
मैंने सुना है कि टिहरी मे मांजफ गाव (प्रताप नगर के पास ) जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़ा गाव है ( कुल परिवार लगभग 1000 हैं ) | इसके बाद ढुंग गाव  (घनसाली के पास कुल परिवार लगभग ९५० हैं) है फिर कंडीयाल  गाव आता है ( लम्बगाव के पास् कुल परिवार लगभग 900 हैं )  , ऐसी मुझे जानकारी है |

क्या मैं सही हूँ ?
यदि किसी भी सदस्य को इस तथ्य के बारे मे जानकारी ही तो  कृपया मेरी दुविधा दूर कीजिये व बोर्ड के सामने इस पर प्रकाश डालिए |


धन्यवाद
विजय सिंह बुटोला





आप सभी  उत्तराखंडी भाई-बहिनों का स्व. श्री इंदरमणि बदोनी जी की जन्म भूमि अखोडी में आपका स्वागत है.  अखोडी के बारे में वेसे तो आप लोगो को पता होगा .. फिर भी में आप लोगो को बता देता हूँ .. अखोडी टेहरी जिले के घनसाली बिलोक में पड़ता है घनसाली से ३० की. मी. की दुरी पर है ,अभी २४ दिसम्बर  श्री बडोनी जी की मूर्ति का अनावरण करने  उत्तराखंड के मुखियामंत्री श्री खंडूरी जी गए थे. मुझे सबसे अच्छी बात उनकी ये लगी, की उन्होने जब अखोडी में भाषण दिए थे . तो गढ़वाली में ही दिए अखोडी.की जनता को खंडूरी जी के भाषण बहुत पसंद आये है.. बाकि अखोडी आज भी टेहरी गढ़वाल में सबसे बड़ा गांव यहाँ पर  करीब ४०० परिवार है.. और करीब १२-१३ जातिया है. अखोडी की पूर्ब में भगवान बिश्वानाथ का मंदिर है , जो बडोनी जी का सपना था की बिश्वानाथ उत्तराखंड का ५वां तीर्थस्थल हो . आज भी बिश्वानाथ मंदिर के दर्शन करने लोग दूर -२ से जाते है. यहाँ पर जून में गंगा दशेरा के नाम से मेला लगता है. और अखोडी के उत्तर में एंच्वा की आछरी  का मंदिर है .आज भी यहाँ पर  बासमती के चवाल की बुशी मिलती है ..यहाँ पर भी लोग दूर -२ से जाते है.. और अखोडी के पास  में  ही महादेव जी का मंदिर है . इस मदिर में आज भी पुरानी प्रथा है . यहाँ  पर ११ गांव वाले मिलकर  २ देवदार के पेड़ लाते है और मंदिर के सामने उनका झुला बनादिया जाता है..  यहाँ  पर जो भी शिव भगत जाता है उसकी मनो कामना पूरी होती है.. आप  सभ लोगो  का अखोडी आवागमन  में स्वागत है .
   धानियाबाद       भगवान सिंह  रावत  अखोडी
             


Offline भगवान सिंह रावत

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बुटोला जी आप ने जो आपने सुना है .हो सकता है ओ सही हो .. लेकिन जो मेने देखा है उसके बारे में आप को थोडा बता देता हूँ आपने ११ गाँव हिदाव तो सुना ही होगा .. यहाँ पर महादेव जी का बहुत बड़ा मंदिर है .यहाँ पर हर ५ साल में देवदार के २ पेडो महादेव जी में खम्ब के रूप में चढाए जाते है ये पेड़ करीब ५० मीटर से भी लम्बे होते है  .. मेने इसकी फोटो भी इस साइड पर डाली है .. १ पेड़ को अखोडी वाले लाते है और  दुसरा पेड़ ९ गाँव मिलकर लाते  है . और ये पेड़ भिलंगना नदी के तट से लाते है ..इसलिए लोग कहते है की अखोडी बड़ा गाँव है ..

Offline Vijay Butola

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Offline BeenuKukreti

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Nice information Rawat ji. Please continue....
    Thanks for all YU'ins who supported for Pratapnagar Medical Camp.